मैं पैदल कॉलेज जा रहा था कि पीछे मुझे किसी ने टक्कर मारी. मुझे चोट लगी पर टक्कर एक खूबसूरत लड़की ने मारी थी, मुझे तो उसे देखते से ही प्यार हो गया था. उसके बाद क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है. मेरी उम्र 25 साल है और मैं महाराष्ट्र के अमरावती जिले से हूँ. मैं बहुत दिनों से अन्तर्वासना की इस हिंदी सेक्स कहानी वाली साइट पर सेक्स कहानियाँ पढ़ रहा था. काफी गर्म और उत्तेजक कहानी पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि अपनी भी सेक्स कहानी आप सभी से शेयर की जाए.
मेरी इस सेक्स कहानी में पहचान गुप्त रखने के लिए नाम बदले हुए हैं. ये कहानी मेरी असल जिंदगी पर आधारित है. मेरी और मेरी जिंदगी निशा की ये सेक्स कहानी थोड़ी लंबी है. इस बात की जहां से शुरूआत हुई थी, ठीक उसी तरह की ये कहानी है. ये कहानी मैं निशा के सहमति से लिख रहा हूँ.
पहले मैं अपने बारे में बता दूँ. मेरा नाम तो आपको पता ही है, मैं कहां से हूँ ये भी आपने जान लिया है. मेरे घर में हम चार लोग हैं. मॉम, डैड, एक छोटा भाई और मैं. छोटा भाई औरंगाबाद में पढ़ाई कर रहा है. डैड का फोरव्हीलर का शोरूम है और मॉम हाउस वाइफ हैं. मेरा पढ़ाई में ज्यादा कोई इंटरेस्ट नहीं था. फिर भी डैड के डर से मुझे ग्रेजुएशन पूरा करना पड़ा. अब मैं डैड के साथ शोरूम संभालता हूँ.
ये कहानी 3 साल पहले की है, जब मैं बीएससी सेकंड ईयर में था. मेरे एग्जाम चल रहे थे. गर्मी का मौसम था, बहुत तेज धूप पड़ रही थी. उस दिन मुझे एग्जाम देने जाने के लिए देर हो रही थी. मैं कॉलेज के लिए घर से निकला, तो देखा कि तो मेरी बाइक ही पंचर पड़ी थी. डैड की बाइक बाजू में ही खड़ी थी. मैंने सोचा कि इसे ही लेकर कॉलेज चला जाऊं, लेकिन किस्मत खराब निकली. बाइक की चाबी डैड के साथ शोरूम घूमने चली गई थी.
फिर मैंने 11 नंबर की बस पकड़ी यानि पडल चलते हुए ही कॉलेज के लिए निकल गया. कॉलेज पास में ही था.
थोड़ी दूर चलने पर ही पीछे से एक जोर की चीख सुनाई दी और मुझे किसी स्कूटी ने ठोक दिया. मैं तो बाल बाल बच गया, बस छोटी-मोटी खरोंच ही आयी थीं. मुझे बहुत गुस्सा आया, ऐसा महसूस हो रहा था कि स्कूटी चलाने वाले के कान के नीचे एक जोरदार रख दूँ. मेरा बड़ा एक्सीडेंट होते होते बचा था. हाथ में भी हल्की चोट आई थी.
मगर जैसे ही मैंने उसे देखा, तो सारा गुस्सा ऐसे गायब हो गया था … मानो मैंने खुद ही कोई गलती कर दी हो.
वो एक लड़की थी, जिसने मुझे स्कूटी से ठोक दिया था. रेड कलर की स्कूटी नीचे गिरी हुई थी. लड़की उठ कर बाजू में खड़ी भी हो गई थी. उसे कुछ लगी नहीं थी.
जब मैंने उस लड़की को देखा, तो बस देखता ही रह गया. ब्लू कलर की जींस, हल्के पिंक कलर का टॉप, जो उस पर बहुत अच्छा दिख रहा था. रेड स्कार्फ से मुँह ढका हुआ था. उसकी आंखें ही दिख रही थीं. आंखों में काजल लगा हुआ था. क्या खूबसूरती थी. मैं तो बस खड़ा का खड़ा ही रह गया. उसका पूरा फिगर मेंटेन था. यही कोई 34-28-36 का फिगर था.
उसकी मीठी आवाज निकली- आपको बहुत चोट लग गई … मुझे माफ़ कर दीजिए. मुझे एग्जाम के लिए देर हो रही थी … इसलिए ऐसा हो गया … प्लीज मुझे माफ कर दीजिए.
इतनी मीठी आवाज … आह मैं बस उसे ही देख रहा था. वो बिना रुके बार बार ‘माफ कर दीजिए..’ बोले जा रही थी.
मैंने अपना होश संभालते हुए, अपने बाएं पैर को पकड़ते हुए उससे कहा- मुझे बहुत जोर से लग गई है. मैं चल भी नहीं पा रहा हूँ.
उसने अपने चेहरे पर से स्कार्फ़ हटाया और फिर से मुझे माफी मांगने लगी.
मैं उसका हसीन चेहरा देखे जा रहा था. उसका चेहरा गुलाबी गुलाबी लग रहा था, नाक बहुत प्यारी थी. एक तो दूध जैसी सफ़ेद और आंखों में काजल. मुझे तो उसे देखते से ही प्यार हो गया था.
मैंने मन में बुदबुदाते हुए कहा- मुझे कॉलेज भी जाना है, एग्जाम के लिए पहले ही देरी हो गई है.
मैंने जो पैर में चोट लगने का नाटक किया था, तो उसने मुझसे कहा- चलो मैं तुम्हें छोड़ देती हूं, जहां जाना है वहां ले चलती हूँ.
उसने मुझसे ये तक नहीं कहा कि चलो हॉस्पिटल चलते हैं.
मैंने उससे कहा- थोड़ा देख कर चला लेती, तो मेरे पैर में फैक्चर नहीं होता, बहुत दर्द हो रहा है मुझे …
मैं वहीं रोड के किनारे बैठ गया. वो ये सुन कर रोने लगी. वो शायद बहुत डर गई थी. उसकी आंखों में आंसू देख कर मैं खड़ा हो गया और मैंने उसे बताया कि मामूली खरोंच है.
तब जाकर उसका रोना बंद हुआ.
वो- कहां जा रहे हो, मैं तुमको उधर तक छोड़ देती हूं.
मुझे भी कॉलेज तक तो जाना ही था, तो मैंने उसे बताया कि मैं भी एग्जाम देने के लिए कॉलेज जा रहा हूँ, तुम मुझे कॉलेज तक लिफ्ट दे दो.
वो- कौन से कॉलेज?
मैं- पी.आर. पाटिल एग्जाम सेंटर है मेरा.
वो- अरे … मैं भी वहीं एग्जाम के लिए जा रही हूँ.
फिर मैंने उसे स्कूटी उठाने में मदद की और उसके पीछे कॉलेज जाने के लिए बैठ गया. अब मैं उसके इतने करीब था … मानो मैं हवा में उड़ रहा था. उसके कपड़ों से परफ्यूम की महक मुझे मदहोश कर रही थी. ऐसा लग रहा था कि बस उसकी कमर से होते हुए उसके पेट को कसके पकड़ लूं.
उससे स्कूटी पर ज्यादा बातचीत तो न हो सकी … इसी बीच कॉलेज आ गया.
वो- आपको ज्यादा लगी तो नहीं न … लिखने में कोई तकलीफ तो नहीं होगी. मेरी वजह से आपको प्रॉब्लम हो गई, मुझे माफ़ कर देना.
मैं- हां तकलीफ तो हो रही है. लेकिन ये कम हो सकती है.
वो- हां बोलिए न कैसे?
मैं- एक कप कॉफी मेरे साथ.
वो कुछ सोचते हुए बोली- अच्छा ठीक है, पेपर होने के बाद.
मैं- वैसे आपने अपना नाम बताया ही नहीं.
वो मुस्कुराते हुए बोली- आपने पूछा ही नहीं.
मैं- आपकी स्माइल बहुत ही प्यारी है.
वो- वो तो है.
फिर जाते हुए उसने कहा- मेरा नाम निशा है. आपके साथ कॉफ़ी के लिए इन्तजार रहेगा … बेस्ट ऑफ लक.
मैं- सेम टू यू, बाय.
मैंने अब तक ऐसे किसी लड़की के बारे में सोचा भी नहीं था. मुझे निशा को देखते से ही उससे प्यार हो गया था. मैं जल्द से जल्द निशा को अपना बनाना चाहता था. जैसे तैसे जल्दी जल्दी मैंने पेपर लिखा और बाहर आकर निशा का इंतजार करने लगा. मैंने किसी भी दोस्त को इस बारे में नहीं बताया था.
थोड़ी देर बाद निशा आ गई. मुझे देखते हुए निशा ने कहा- ओह..हो … इंतजार हो रहा था मेरा!
मैं- नहीं … तो बस मुझे घर जाना है, जिसने मेरा एक्सीडेंट किया है, उसे ही मुझे घर ड्राप करना होगा ना! साथ जाते हुए कॉफी भी पी ही सकते हैं.
निशा- हम्म … स्मार्ट हो!
मैं- और तुम खूबसूरत.
निशा हंसते हुए बोली- वो तो मैं हूँ ही. चलो फिर घर ड्राप कर देती हूं और आगे कॉफी शॉप भी है.
हम दोनों घर के लिए निकल गए. बीच में कॉफ़ी शॉप पर कॉफ़ी के लिए रुख कर दिया. उधर बैठ कर एक दूसरे के बारे में बात की. जैसे कहां से हो, नाम क्या है, किस कॉलेज से हो, पेपर कैसा गया इत्यादि.
कॉफ़ी शॉप से निशा ने मुझे घर ड्राप किया, तब ही मम्मी और आंटी (यानि मेरी मम्मी की बहन व मेरी मौसी) कहीं बाहर से आ रही थीं. उन्होंने हम दोनों को आते हुए देख लिया. जब एक्सीडेंट हुआ था, तो मेरे कपड़े खराब हो चुके थे.
मम्मी- अरे बेटा क्या हुआ? और ये हाथ पर चोट कैसे लगी … ये कौन है?
मैं- मम्मी आप घर में चलिए, सब बताता हूँ.
फिर अन्दर आकर जो कुछ भी हुआ था मैंने मम्मी को सब बताया.
मम्मी ने निशा को देखते हुए कहा- बेटा निशा, गाड़ी थोड़ी संभाल कर चलाया करो.
निशा- जी आंटी. मुझसे गलती हो गई, प्लीज़ माफ़ कर दीजिएगा.
ऐसे ही हम सभी बहुत सारी बातें की. कुछ देर बाद निशा मुझसे ‘सी यू टुमारो … बाय..’ करके चली गई.
मेरी तो किस्मत जैसे मुझ पर मेहरबान थी … जो मैं उससे बोलना चाहता था, वो उसने ही कह दिया.
जैसे तैसे दिन गुजर गया. रात को उससे फोन पर बात हुई, तो उसने सुबह आने का कहा.
अगले दिन मैं जल्दी से रेडी हो गया था. सुबह 10.30 को निशा मुझे लेने आ गयी. क्या हॉट माल लग रही थी. वो ब्लैक पटियाला ड्रेस में कहर ढा रही थी.
निशा- तारीफ नहीं करोगे?
मैं- अरे वो ही सोच रहा था … और तुम लग ही रही हो इतनी खूबसूरत. तुम सेक्सी माल लग रही हो, ऐसा मैं उससे अब भी नहीं बोल सकता था.
निशा- अच्छा जी.
मैं- हां जी.
हम दोनों की पसंद बहुत हद तक एक जैसी ही थी. निशा और मैं बहुत ही नजदीक आ गए थे. लेकिन मैंने उसे प्रपोज करने में 6 महीने लगा दिए.
अक्टूबर का महीना चल रहा था. उस दिन 26 तारीख थी … जब मैंने उसे प्रपोज़ करने की ठान ली थी.
मैंने उसे कॉल किया और कहा- आज कुछ खास है … मुझे मिलना है तुमसे.
तो उसने भी हां में जवाब देते हुए कहा- कब मिलना है … और कितने बजे?
तो मैंने उसे अपने घर पर ही मिलने के लिए कहा और 4 बजे का टाइम बता दिया.
मेरे मॉम डैड मेरे भाई से मिलने औरंगाबाद गए थे, तो निशा को प्रपोज करने का आज अच्छा मौका था.
मैं तैयारी करने में लग गया. अपने रूम में मैंने गुलाब की पंखुड़ियों से फर्श पर ‘आई लव यू निशा..’ लिख दिया. पूरे रूम में रोमांटिक माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. मोमबत्तियों से रूम को रोशन कर दिया. मुझे भी तैयार होना था … सो मैं नहाने के लिए जल्दी से बाथरूम में घुस गया और बॉडी के हेयर रिमूव कर दिए. मैं जिम जाता हूं ना तो मुझे बॉडी पर बाल अच्छे नहीं लगते. मैं अपनी पूरी बॉडी एकदम क्लीन रखता हूं.
आज निशा के बारे में सोच कर नहाते नहाते मैंने अच्छे से मुठ मारी. मेरा लंड 6.5 इंच का है … जो औसतन भारतीय मर्दों का होता है.
अब 4 बजने वाले थे. मेरा नहाना भी हो हो गया था. निशा आने वाली थी. मैंने कपड़े पहने और अच्छे से तैयार हो गया. तभी डोरबेल बज गई. मैं दौड़ते हुए गया और दरवाजा खोला. मेरे सामने निशा खड़ी हुई थी, मैं उसे देखता ही रह गया. वो रेड कलर की ड्रेस में थी, जो उसके घुटनों तक आ रही थी. वो बहुत ही हॉट लग रही थी. मुझे लगा कि जैसे उसे पता हो चल गया था कि मैं उसे प्रपोज़ करने वाला हूँ.
निशा ने आंख दबाई- यहीं घूरोगे या घर में अन्दर भी आने दोगे?
मैं- आपका ही तो इंतजार था मैडम.
निशा- अरे वाह मैडम … ऐसी क्या खास बात है … जो इतनी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे?
मैं उसे पट्टी देते हुए बोला- इसे आंखों पर बांध लो, सरप्राइज़ है.
निशा ने खुश होते हुए पूछा- क्या सरप्राइज़ है?
मैं- पहले ये बांधो … अभी बताता हूं.
निशा ने आंखों पर पर पट्टी बांध ली. मैं उसे अपने रूम में ले गया. उसकी आंखों पर से पट्टी हटा दी और उसके सर को, फर्श पर बने हुए ‘आय लव यू..’ की ओर कर दिया.
जब मैंने घुटनों के बल बैठ कर उसे प्रपोज़ किया, तब वो बहुत खुश हो गई थी.
प्रपोज़ करते वक़्त सब गुलाब का फूल देते हैं, लेकिन मैंने उससे चॉकलेट दी, जो उसे बहुत पसंद थी.
जैसे ही मैंने उसे प्रपोज़ किया, तो उसने मुझे कसके गले से लगा लिया था और किस किया.
ये किस मेरी लाइफ का पहला किस था. किस छोटा सा ही था, उसने बस होंठों से होंठों को लगाया और हटा लिए.
निशा- डंबो … कोई प्रपोज़ के लिए इतना वक़्त लेता है. मुझे तो लगा था, जब लास्ट एग्जाम हुए थे, तब ही तुम प्रपोज़ कर दोगे.
मैं- निशु … मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ. तुम्हें कभी खोना नहीं चाहता. आय लव यू सो मच!
निशा- आय लव यू टू मेरी जान.
मैंने निशा को गले लगाया और उसी तरह उससे बातें करने लगा- मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ … तुमसे कभी अलग नहीं होना चाहता.
निशा- मेरी जान, मैं भी तुमसे बहुत मोहब्बत करती हूँ … कब से इस दिन का इंतजार था मुझे.
निशा ने मुझे बेड पर गिरा दिया, जो बाजू में ही था. वो मेरे ऊपर खुद भी गिर गई. अपना सर मेरे सीने पर रख कर मुझे बातें करने लगी.
निशा- इतना कोई लेट करता है क्या? कितनी बार मैंने तुम से बातों बातों में कहा भी कि मैं तुम्हें पसन्द करती हूँ लेकिन तुम डंबो समझे ही नहीं. पहले दिन ही जब तुम्हें देखा था, तब ही मुझे पसंद आ गए थे तुम.
ये सुनकर मैंने उसे ऊपर की ओर खींच लिया और अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिये. वो भी बिना किसी विरोध के मेरा साथ देने लगी.
मैं- निशु, मुझे भी इस वक्त का इंतजार था कि कब तुम मेरी बांहों में होगी. तुम्हारे सपने मैं कब से देख रहा था.
निशा ने आंख दबाते हुए चुटकी ली- सपने में सिर्फ देख रहे थे या कुछ कर भी रहे थे.
मैं- अच्छा बच्चु.
ये कहते हुए उसे किस करने लगा. वो भी मेरा साथ दे रही थी. किस करते मेरा हाथ कब उसके मम्मों पर चला गया, कुछ पता ही नहीं चला.
निशा के चूचे मस्त टाइट थे. इस समय वो भी पूरे मूड में थी. जैसे कह रही हो कि बस अभी ही मुझे चोद दो. निशा सिर्फ वन पीस ड्रेस में थी, जो उसके घुटनों तक था. उसका ये ड्रेस उतारने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगी.
मैंने उसके उसके ड्रेस के पीछे की चैन खोल दी और उसका ड्रेस उसके जिस्म से अलग कर दिया.
आह क्या माल लग रही थी. पिंक पैंटी और ब्रा में कसे हुए उसके जिस्म को मैं ललचाई निगाहों से देखने के लिए थोड़ा अलग हुआ.
मैं उसे देखने लगा. मेरी जान कयामत लग रही थी. एकदम टाइट चूचे, पतली सी मुलायम कमर, उसका जिस्म हल्का गुलाबी था. इतनी खूबसूरत था कि सोच कर मैं मन ही मन खुश हो रहा था. उसने अपना चेहरा शर्म के मारे हाथों से ढक लिया था.
आगे की कहानी अगले भाग में थोड़ा इंतजार तो आप कर ही सकते हो दोस्तो.
मैंने अब तक जितनी भी कहानियां पढ़ी हैं, उसमें ये सब नहीं था. शुरूआत ही नहीं थी, बस स्टार्ट से ही सेक्स था. लेकिन जब मैं ये कहानी लिख रहा हूँ, तब मैं कुछ बातें भूल गया था. ये वो बातें थीं जो हमने की थीं. वो मुझे निशा ने याद दिलाईं. अभी तो सिर्फ शुरूआत है दोस्तो … आप सोच भी नहीं सकते कि आगे की सेक्स स्टोरी में क्या क्या हुआ. हम दोनों को सेक्स में नए नए प्रयोग किए, कई तरह के आसनों से चुदाई की.
मैं चाहता, तो ये सब बीच से भी स्टार्ट कर सकता था. लेकिन मुझे पूरी कहानी लिखनी थी. आप सबको निशा और मैं कैसे मिले, वो बताना था. आगे की कहानी अगले भाग में.
आपको सेक्स कहानी की शुरूआत कैसी लगी, ये मुझे जरूर बताएं.
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैंने निशा की ड्रेस के पीछे की चैन खोल दी और उसका ड्रेस उसके जिस्म से अलग कर दिया.
आह क्या माल लग रही थी. पिंक पैंटी और ब्रा में कसे हुए उसके जिस्म को मैं ललचाई निगाहों से देखने के लिए थोड़ा अलग हुआ.
मैं उसे देखने लगा. मेरी जान कयामत लग रही थी. एकदम टाइट चूचे, पतली सी मुलायम कमर, उसका जिस्म हल्का गुलाबी था. इतनी खूबसूरत था कि सोच कर मैं मन ही मन खुश हो रहा था. उसने अपना चेहरा शर्म के मारे हाथों से ढंक लिया था.
अब आगे:
मैंने उसके पैरों पर किस कर रहा था. उसके पैर बड़े कोमल लग रहे थे. निशा के पैरों से होते हुए मैं उसकी पैंटी तक आ गया. उसकी पैंटी पारदर्शी थी. उस पर एक गुलाब का फूल बना हुआ था, जो सिर्फ उसकी चुत को ढके हुए था. उसकी सेक्सी और कामुक सिसकारियां रूम के माहौल को और भी रोमांटिक बना रही थीं.
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत पर किस किया. निशा की पैंटी गीली हो चुकी थी. मैं वैसे ही उसकी पैंटी पर से ही चुत को चाट रहा था. उसकी चुत का स्वाद बहुत ही मस्त लग रहा था.
मैंने उसकी चुत पर काट लिया, उसने बहुत जोर से आवाज की और कहा- मेरी जान निकालना चाहते हो जान!
मैं- नहीं निशु … तुम्हारे लिए जान देना चाहता हूँ.
ये सुनते से ही उसने मुझे ऊपर की ओर खींच लिया और किस करने लगी. वो अपनी जुबान मेरे होंठों से रगड़ने लगी, मैंने अपना मुँह खोल कर उसकी जीभ को अन्दर ले लिया और चूसने लगा. एक हाथ से मैं उसके रसीले मम्मों को दबाने लगा. फिर ब्रा उसके जिस्म से एक झटके में अलग करके एक दूध को मुँह में लेकर चूसने लगा.
निशा का जिस्म गर्म भट्टी की तरह तप रहा था. सेक्स के वक़्त लड़की जो आवाजें निकालती है ना, वो सुन कर बहुत मजा आता है. उस वक्त मर्द और भी जोश में आ जाता है.
मैं उसके ऊपरी जिस्म को किस करने लगा. निशा की मस्त आवाजों से रूम गूंज रहा था. मेरा हाथ अब उसकी चूत से खेल रहा था.
निशा ‘हहह अम्म्म आहहह … मुझे अपना बना लो जान..’ ऐसी आवाजें निकाल रही थी.
मैं उसकी पैंटी में हाथ डाल कर उसकी चुत में एक उंगली डालने लगा. वो एकदम चहक उठी. उसने अपने नाखून मेरी पीठ पर गाड़ दिए. मुझे भी दर्द हुआ, लेकिन सेक्स के वक्त कुछ नहीं सूझता. मैंने उसकी पैंटी को निकाल दिया. क्या मस्त चुत थी … एकदम ताज़ी ब्रेड की तरह फूली हुई चुत मुझे मदहोश किए जा रही थी. एकदम गोरी और गीली चुत, जैसे उससे शहद टपक रहा हो.
मैंने देखते ही उस पर किस किया. क्या मादक खुशबू थी … टेस्ट भी नमकीन था. पहली बार चुत देखने में और छूने का मजा आप समझ ही सकते हो.
निशा की चूत में मैं उंगली कर रहा था और उसके पेट पर किस जारी थे. उसकी नाभि के ठीक नीचे एक तिल था, जो मुझे अच्छा लग रहा था. उसकी चुत पर के बाल शायद उसने आज ही साफ किए थे. एकदम मखमल की तरह थी.
मैंने अब तक जितने भी इंडियन पोर्न वीडियोज देखे थे, उसमें चुत अक्सर काली होती थी … तो मैं सोचता था कि अपने इधर की सारी चुत काली ही होती होंगी. पोर्न स्टार की तरह गोरी नहीं … लेकिन मैं निशा की गोरी चुत देख कर सोचने लगा कि मैं कितना गलत था. मेरी निशा की चूत तो किसी पोर्न स्टार की तरह एकदम गोरी और मखमली थी.
तभी निशा मेरी शर्ट निकालने लगी. मैं समझ गया कि निशा को अब मेरा देखना है. निशा ने मेरी शर्ट अलग कर दी और मेरी पैंट को भी उतार कर फेंक दी. अंडरवियर के ऊपर से ही वो मेरे लंड को सहलाने लगी. उसकी आंखों में लंड देखने की लालसा साफ़ दिख रही थी. उसने एक ही झटके में मेरा अंडरवियर खींच लिया और अब हम दोनों बिना कपड़ों के हो गए थे.
अपने नरम हाथों से जैसे ही निशा ने मेरे लंड को छुआ, मुझे लगा कि जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में जन्नत की सैर कर रहा हूँ.
बच्चा जैसे पहली बार किसी चीज को देखता है, ठीक उसी तरह निशु मेरे लंड को आगे पीछे करके देख रही थी.
आह क्या मस्त अहसास था वो … निशा ने मेरे लंड को किस किया और अपने मुँह में ले लिया. वो मेरी तरफ आंखें करके मेरे लंड को चूसने लगी. मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि वो ये करेगी.
आपको आगे विस्तार से भी बताने का मन है कि उसने ऐसा कैसे किया था. मैं तो बस मजे ले रहा था और मैं बस दो मिनट में ही झड़ गया. जब आप किसी लड़की के साथ पहली बार सेक्स कर रहे हो, तो आप जानते ही हो कि कितनी जल्दी झड़ना हो जाता है. मैं निशु के मुँह में ही झड़ गया था. मुझे बताने का टाइम ही नहीं मिला था. लेकिन निशा ने लंड का रस न केवल पी लिया था, बल्कि वो अब भी लंड को चूसे जा रही थी.
मैं तो सन्न रह गया कि निशा ने सारा माल पी लिया और अभी भी लॉलीपॉप की तरह लंड चूस रही थी.
निशा के इस तरह चूसने से मेरा लंड 5 मिनट में ही फिर से खड़ा हो गया. निशा ने मेरी और वासना भरी निगाहों से ऐसे देखा, जैसे कह रही हो कि अब मेरी बारी उसकी चुत को ही चूसने की थी.
मैंने देर न की और निशा को अपने ऊपर से हटा कर उसे बेड पर पटक दिया. उसके होंठों पर अभी भी मेरा वीर्य लगा हुआ था, जो उसने अपनी जुबान से चाट कर साफ कर लिया था. मैंने उसके होंठों की तरफ अपने होंठ बढ़ाए, तो उसने मेरा सर पकड़ कर अपनी चुत की ओर धकेल दिया.
मैंने भी उसकी दोनों टांगों को फैला कर चुत को पूरा खोल दिया. उसकी चुत को जैसे ही मैंने अपनी उंगलियों से फैलाया, तो चुत के अन्दर का नजारा एकदम से सुर्ख लाल था. अन्दर से उसका रस रिस रहा था. सच में चुत की बहुत मादक खुशबू थी. मैं उसकी चुत को चाटने लगा. मैं अपनी जुबान को चुत के अन्दर धकेल रहा था.
वो जोर जोर से आवाज करने लगी- आहहह … जान … और जोर से चूसो जान … उहम्मम … और जोर.
ऐसे ही मैं उसको 5 या 6 मिनट तक चूसता रहा. साथ ही मैं चुत में अपनी एक उंगली को अन्दर बाहर कर रहा था. वो कुछ देर बाद झड़ गई.
मैं चुत से मुँह हटाना चाहता था, लेकिन निशु ने अपने टांगों से मेरे सर को पकड़ लिया और हाथों से चुत पर दबा दिया. ना चाहते हुए भी मैं उसका सारा माल पी गया.
बहुत ही टेस्टी रस था, मुझे क्या पता था आगे ये मेरी आदत बन जाएगी.
अब निशा ने मुझे ऊपर खींचा और मुझे किस करने लगी. एक मिनट के होंठों के किस के बाद मेरा लंड एक टाइट हो गया था. मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया. निशा की चूत तो चूसने के बाद चिकनी हो ही गई थी. बस मेरे लंड को फिर से गीला करना था.
मैंने निशा को इशारा किया और निशा ने मेरा लंड मुँह में लेकर गीला कर दिया.
मैं फिर से उसकी टांगों के बीच में आ गया. अपना मोटा लंड उसकी चुत पर रगड़ने लगा. निशा की चुत बहुत टाइट थी. उसका भी पहली बार था. मेरी ये नहीं समझ आ रहा था कि कुंवारी होने के बावजूद भी निशु को इतना एक्सपीरियंस कैसे था.
मैं लंड उसकी चुत पर रगड़ने लगा.
निशु- जान अब अन्दर डाल दो प्लीज़, और मत रुको.
मैंने उसकी दोनों टांगों को पकड़ कर चौड़ा किया, जिससे लंड आसानी से अन्दर चला जाए. मैंने चुत पर ठीक से लंड सैट किया और एक धक्का दे दिया. मेरे लंड का सुपारा चुत में घुसता चला गया.
निशा ने बहुत जोर से चीख मारी, जिससे मैं डर गया था. मुझे कुछ सूझा ही नहीं. उसका मुँह बंद करने के लिए पास में रखी हुई निशा की पैंटी को मैंने उसके मुँह में डाल कर उसका मुँह बंद कर दिया … जिससे वो चिल्ला ना सके.
ऐसा करते देख, वो मुझे आंखें फाड़ कर देख रही थी. मुँह बंद होने से वो अब कुछ ज्यादा ही छटपटा रही थी.
मैंने उसकी टांगों को अपने कंधों तक उठाया और उसके हाथों को कसके पकड़ लिया. मैंने फिर से एक झटका दिया, तो मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चुत में घुसता चला गया था.
जैसे ही मैंने अगला झटका दिया, पूरा का पूरा लंड चुत में समा चुका था.
निशा की हालत बहुत खराब हो गई थी. वो बेहद छटपटा रही थी … लेकिन उसका मुँह बंद होने की वजह से कुछ बोल नहीं सकती थी. मैं लगातार अपने लंड को अन्दर बाहर कर रहा था.
कुछ देर बाद वो शांत हो गई और उसने छटपटाना बंद कर दिया.
‘अम्म … हम्म्म्म … ओह्ह..’ अब निशा मस्त आवाज निकालने लगी थी.
मैंने ये देख कर उसके हाथ छोड़ दिए. उसे मजा आने लगा था. उसने अपने मुँह से पैंटी निकाली और मुझे किस करने लगी. किस करते हुए उसने पैंटी को मेरे मुँह में डाल कर मुँह पर हाथ रख दिया. जिससे मैं पैंटी को बाहर ना निकाल सकूं.
उसने मेरे कान में कहा- जान इससे मत निकालना.
मैंने उसकी बात मान ली और उसे और जोर से चोदने लगा. निशु ने अपने नाखूनों से मेरी पीठ पर बहुत बार खरोंच कर नाखून गड़ा दिए थे … लेकिन इसमें भी मज़ा आ रहा था.
दोस्तों सेक्स करने से पहले लड़कियों के नाखून देख लेने चाहिए. अगर नाखून बड़े हों, तो शर्ट नहीं निकालना चाहिए.
इस तरह हम दोनों ने कोई 15 मिनट तक धकापेल चुदाई की. फिर निशु झड़ने वाली थी.
निशा मुझसे कहने लगी- आह और जोर से … अब रुकना मत … और मेरे से पहले झड़ना मत.
मैं भी जोर जोर से उसे चोदने लगा और उसके मम्मों को दबाने लगा.
कुछ ही देर में वो झड़ते हुए जोर से आवाज निकालने लगी- आह जान और जोर से चोदो मुझे. … आह और जोर से जान … मेरी चुत को फाड़ दो … और जोर से.
ऐसा कहते हुए वो नाखून मेरी पीठ पर जोर से गड़ाते हुए झड़ गई और एकदम से शांत हो गई.
मगर अभी मेरा झड़ना बाकी था. मैं और जोर से चुदाई करने लगा और एक मिनट बाद मैं भी उसी की चुत में झड़ गया. मेरा मुँह बंद होने के वजह से मैंने पूछा भी नहीं कि वीर्य अन्दर निकालूं या बाहर.
मैंने अन्दर ही रस निकाल दिया था. उसकी चुत मेरे वीर्य से भर गई थी और मैं निढाल होकर निशा के ऊपर गिर गया.
कुछ देर ऐसे ही हम दोनों चिपक कर पड़े रहे. निशा ने मेरे मुँह से पैंटी निकाली और मुझे किस किया- आय लव यू जान. इतनी बात मानते हो मेरी.
मैं- लव यू टू निशु. तुम्हारी हर बात मानता हूं. निशु मैं एक बात पूछूँ?
निशा- हां बेबी … पूछो.
मैं- इतना एक्सपीरियंस कैसे … तुम्हारा तो फर्स्ट टाइम था.
निशा- डंबो … मैं वीडियोज देखती हूँ न. कब से मुझे इस दिन का इंतजार था कि कब तुम और मैं एक हो जाएंगे.
मैं- ओह..ह … वीडियोज़ देख कर सीखा. तुमने बहुत ही मजा दे दिया जान.
अब हम दोनों ऐसे ही बिना कपड़ों के बातें करने लगे. बात करते करते कब हमारी आंख लग गयी, कुछ पता ही नहीं चला. दो घंटे के बाद जब मैं उठा, तो निशा सो रही थी. मेरा मन तो था कि एक बार और चुदाई हो जाए. लेकिन उसे घर भी जाना था. टाइम भी बहुत हो गया था.
मैंने उसे उठाया … वो उठ गयी.
बहुत खुश थी मेरी जान. अच्छे से चुदाई की ख़ुशी लड़की के चेहरे में एक अलग ही चमक ले आती है.
निशा उठी, तो उसके पैरों के बीच खून लगा हुआ था. मैंने निशा को अपने हाथों में उठा लिया और बाथरूम ले गया. साथ में शावर लिया. उधर सेक्स नहीं किया. बस किस करते हुए हम नहा रहे थे. नहाते हुए निशा और मैं बात कर रहे थे.
निशा- बेबी तुम मेरी एक बात मानोगे?
मैं- हां निशु.
निशा- मुझे सेक्स लाइफ में बहुत से एक्सपेरिमेंट करने हैं. हर तरह से मजा लेना है. तुम और मैं … और हमारी सेक्स लाईफ मस्त होनी चाहिए. हमारी सेक्स लाइफ रियल लाइफ से बहुत अलग होगी. रियल लाइफ में तुम जैसे कहोगे, वैसे मैं करूंगी … और सेक्स लाइफ मेरे हिसाब से … प्लीज़ जान.
मैं- निशु … जैसा तुम्हें अच्छा लगेगा, हम वो सब करेंगे.
निशा- बेबी तुम मुझे कभी किसी भी बात के लिए मना नहीं करोगे. मुझसे वादा करो.
मैं- वादा करता हूँ.
निशा मुझे बांहों में कसके किस करने लगी. हम दोनों जल्दी से नहा लिये और जल्दी से बाहर आ गए. बाहर आने के बाद भी हम बिना कपड़ों के ही थे. हम दोनों ने टॉवल से एक दूसरे को सुखाया. मैं निशा के कपड़े देखने लगा. उसकी पैंटी तो गीली हो गई थी.
निशा ने वो वैसे ही पहन ली और ब्रा भी. फिर कपड़े पहने और बाल ठीक किए.
वो ऐसे बिना मेकअप के घर नहीं जा सकती थी, घर वालों को शक हो जाता. मैं उसे मम्मी के रूम में ले गया और उसने हल्का मेकअप किया. वो रेडी हो गई.
मैं अभी भी टॉवल में ही था.
निशा ने मुझे किस किया और कहा- बेबी अपना वादा याद रखना … और हां मुझे बहुत सी ऑनलाइन शॉपिंग भी करनी है. ठीक 8 बजे मेरे घर आ जाना. कुछ भी नोट्स मांगने के बहाने से.
इन छह महीनों में हम स्टडी रिलेटेड नोट्स अदला बदली करते थे, तो घर आना जाना लगा रहता था.
निशा के जाने के बाद मैं निशा की याद करते-करते फिर से सो गया. शाम को 7 बजे मैं उठा और डैड को कॉल किया- आप लोग कहां हो … कब आ रहे हो.
मैंने ये सब पता करने के लिए फोन किया था.
डैड ने बताया कि वो दो दिन बाद आएंगे.
मतलब मेरे पास निशा के साथ मजे करने के लिए अभी दो दिन और थे. मैं जल्दी से तैयार हुआ और निशा के घर चला गया. उसकी मेड ने दरवाजा खोला और मैं अन्दर चला गया.
आंटी को हैलो कहा, वो टीवी देख रही थीं. मैंने आंटी से बात की और निशा के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि वो रूम में है … पढ़ाई कर रही है.
निशा यूनिवर्सिटी में टॉपर है … और ये पढ़ने वाली लड़कियां कुछ ज्यादा ही रोमांटिक होती हैं, मैं आज समझ चुका था.
मैं निशा के रूम में चला गया. निशा पजामा ओर टी-शर्ट में थी.
मैंने उसे किस किया और पूछा- क्यों बुलाया शोना.
निशा- बेबी मुझे शॉपिंग करनी है, हमारे लिए.
मैं- हमारे लिए? क्या खरीदना है?
निशा मोबाइल मेरी ओर करते हुए बोली- देखो बेबी.
मोबाइल में सेक्स टॉयज और सेक्सी पैंटी-ब्रा, अंडरवियर, बीडीएमएस सेक्स के लिए सामान जैसे डिल्डो, पेगीज (स्ट्रामऑन), पेनिस सेलिव, पेनिस केज, वाइब्रेटर, जैसी चीजें थीं.
मैं तो ये सब देख कर निशा को ही देखता रह गया.
मैंने हैरानी से कहा- शोना ये सब किसलिए?
निशा- बेबी तुमने वादा किया है. सेक्स लाइफ मेरी मर्जी से चलेगी.
मैं- शोना तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ.
निशा- मेरे सेक्स स्लेव (गुलाम) बनोगे पूरी लाइफ के लिए?
उसने ये कातिलाना मुस्कुराहट के साथ कहा.
मैं- शोना तुम्हारे लिए कुछ भी बन सकता हूँ.
मैंने और निशा ने किस किया. उसने मुझसे कहा- रुको … मैं अभी आयी.
उसने बाहर जाकर देखा कि उसकी मम्मी क्या कर रही हैं. उसकी मम्मी टीवी देख रही थीं. वो वापस आयी और अपना पजामा नीचे करते हुए बोली- चलो मेरे गुलाम … मेरी चुत चूसो … और मुझे खुश कर दो.
मुझे तो उसके बोलने की देर थी. मैंने उसकी चुत को चाटना शुरू कर दिया. वो अपने मुँह पर हाथ रखकर आवाज नहीं निकाल रही थी. मैं मजे से उसकी चुत चाट रहा था. कोई दस मिनट तक चुत चटवाने के बाद निशा मेरे मुँह में ही झड़ गई. मुझे फिर से उसका रज पीना पड़ा. वो झड़ कर शांत हो गई.
निशा ने मुझसे बिना पैंट उतारे जल्दी से लंड बाहर निकालने को कहा. मैंने पैंट की चैन नीचे की और लंड बाहर निकाल दिया. निशा ने सीधे लंड मुँह में ही ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
आह क्या मस्त लंड चूस रही थी … मैं आपको बता नहीं सकता.
थोड़ी देर में मैं भी झड़ने वाला था, तो मैं उसका सर पकड़ कर लंड पर दबाने लगा. वो मस्ती से लंड चूसे जा रही थी. मैं भी उसके मुँह में ही झड़ गया. निशा भी मेरे लंड का सारा माल पी गई. वो वीर्य की आखरी बूंद तक निचोड़ कर पी गई.
मैंने जल्दी से अपना लंड पैंट के अन्दर किया और थोड़ी देर बात उससे की. उसे जो चीजें खरीदनी थीं, उसने ऑनलाइन मेरे एड्रेस पर आर्डर कर दीं.
दोस्तो, ऐसे पहली बार निशा ने और मैंने चुदाई की. आपको हमारी चुदाई की कहानी कैसी लगी, ये जरूर बताएं. आप ईमेल करके मुझे लिखें ताकि मैं आगे की सेक्स कहानी भी आपके साथ शेयर कर सकूं.
मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि निशा इतनी अच्छी लाइफ पार्टनर मिलेगी … जो मुझे मेरी सेक्स लाइफ इतनी अच्छी बना देगी. हमने क्या शॉपिंग की, वो आप नेट से सर्च कर लीजिए. जिससे आपको आने वाली कहानियां पढ़ने में मजा आए.
आगे की सेक्स कहानी निशा की जुबानी सुनने के लिए तैयार रहिए.
ये सेक्स कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं मैं पहली बार कहानी में लिख रहा, कुछ गलतियां होना लाजिमी हैं. प्लीज़ नजरअंदाज कर दीजिएगा.
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